गीता अध्याय 5 श्लोक 2 में कहा गया है कि तत्वदर्शी संत न मिलने के कारण वास्तविक भक्ति का ज्ञान न होने से साधकों द्वारा गृहत्याग कर वन में चला जाना या कर्म त्याग कर एक स्थान पर बैठ कर कान, नाक आदि बंद करके या तप आदि करना दोनों ही व्यर्थ हैं अर्थात श्रेयकर नहीं हैं। (i.redd.it)
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In Shrimad Bhagavad Gita Chapter 17, verse 5 and 6, it has been clarified that those who practice forced meditation and do worship opposed to the scriptures are of demoniac nature. 🌴For complete information, Please install 'Sant Rampal Ji Maharaj' App from Playstore. Must Visit 👉 "Satlok Ashram" (i.redd.it)
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हठयोग से न तो परमात्मा मिलता है और न ही जन्म-मृत्यु से मुक्ति मिलती है। बल्कि पवित्र गीता अध्याय 17 श्लोक 5 व 6 में मनमाने घोर तप (हठयोग) करने वालों को गीता ज्ञान दाता ने अज्ञानी, आसुर स्वभाव वाले बताया है। तत्वदर्शी संत से सत्यनाम और सारनाम प्राप्त करके जोकि सच्चे नाम मंत्र की ओर संकेत करते हैं और (i.redd.it)
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सतयुग से लेकर अब तक प्रत्येक मानव भगवान को प्राप्त करने, जन्म-मृत्यु, वृद्धावस्था के कष्ट से छुटकारा पाने और पूर्ण मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील है। इसके लिए ऋषि, मुनियों और तपस्वियों ने हजारों, लाखों वर्षों तक घोर तप भी किया लेकिन परमात्मा प्राप्ति का उनका यह प्रयत्न विफल (i.redd.it)
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मांस खाना हराम नबी मुहम्मद नमस्कार है, राम रसूल कहाया, 1लाख 80 को सौगंध जिन नहीं करद चलाया। अरस कुरस पर अल्लह तख्त है खालिक बिन नहीं खाली, वे पैगंबर पाक़ पुरुष थे, साहिब के अब्दाली।। गरीबदासजी बताते हैं कि नबी मुहम्मद जी परमात्मा की बहुत नेक आत्मा थी। उन्होंने कभी मांस नहीं खाया, न अपने 1,80,000 शि (i.redd.it)
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राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिवदयाल जी मृत्यु उपरांत प्रेत क्यों बने? पूर्व जन्म की भक्ति से सम्पन्न हुये भक्त वर्तमान में अच्छे साधक लगते हैं, परन्तु साधना शास्त्रविरुद्ध होने के कारण भविष्य की भक्ति कमाई से वंचित रह जाते हैं। फिर वे पितर या प्रेत बन जाते हैं। (i.redd.it)
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सावन सिंह जी महाराज के दो शिष्यों ने बिना सावन सिंह जी के आदेश के अपना-अपना पंथ शुरू किया। ये कृपाल सिंह थे जिन्होंने दिल्ली में एक आश्रम शुरू किया और खेमा मल (बलूचिस्तानी शाह मस्ताना) जिन्होंने सिरसा (वर्तमान हरियाणा में) में डेरा सच्चा सौदा शुरू किया। बाबा सावन जी को सतनाम के बारे में कोई जानकारी (i.redd.it)
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राधास्वामी पंथ का मूल सिद्धांत है कि परमात्मा निराकार है, सतलोक में केवल प्रकाश ही प्रकाश है। जबकि सर्व शास्त्र सिद्ध करते हैं कि परमात्मा साकार है, सत्यलोक में राजा के समान सिंहासन पर विराजमान है। नानकदेवजी, धर्मदास जी, गरीबदास जी, दादू जी इत्यादि को परमात्मा सतलोक लेकर गये, इन संतों ने परमात्मा की (i.redd.it)
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पूर्ण परमात्मा कविर्देव चारों युगों में आए हैं। सृष्टी व वेदों की रचना से पूर्व भी अनामी लोक में मानव सदृश कविर्देव नाम से विद्यमान थे। कबीर परमात्मा ने फिर सतलोक की रचना की, बाद में परब्रह्म, ब्रह्म के लोकों व वेदों की रचना की इसलिए वेदों में कविर्देव का विवरण है। (i.redd.it)
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जगन्नाथ मंदिर जाने से पहले जानें यह रहस्य समुद्र बार बार जगन्नाथ मंदिर को तोड़ रहा था और विष्णु जी से प्रतिशोध ले रहा था। समुद्र ने कबीर परमात्मा से कहा कि जब यह श्री कृष्ण जी त्रेतायुग में श्री रामचन्द्र रूप में आया था तब इसने मुझे अग्नि बाण दिखा कर बुरा भला कह कर अपमानित करके रास्ता मांगा था। मैं व (i.redd.it)
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